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मैं भारत का (की) नागरिक हूँ, रिंग मास्टर की धुन पर नाचने वाला जोकर नही
April 5, 2020 • Mohd rizwan

“मैं भारत का (की) नागरिक हूँ, रिंग मास्टर की धुन पर नाचने वाला जोकर नहीं”


05/04/2020  M RIZWAN 

 

आज नौ बजे नौ मिनट के दीया, मोमबत्ती या फिर मोबाइल, टार्च के जरिये प्रकाश करने के पीएम मोदी के आह्वान की एक हिस्से में बड़ी आलोचना हो रही है। उसका कहना है कि सरकार कोरोना से निपटने के लिए ज़रूरी उपाय करने के बजाय तमाम तरह के टोटकों में व्यस्त है। पहले मोदी ने ताली और थाली बजवायी और अब दीया और मोमबत्ती जलवा रहे हैं। आलोचकों का एक बड़ा हिस्सा इसे विज्ञान के ख़िलाफ़ और अंधविश्वास से जोड़कर देख रहा है। इस पूरे मसले पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएँ आयी हैं। यहां उनमें से कुछ प्रमुख को पेश करने की कोशिश की गयी है-


भाकपा (माले) ने कोरोना आपदा से लड़ने के नाम पर पांच अप्रैल को घरों की बत्तियां बुझाकर दिया जलाने के प्रधानमंत्री के आह्वान को अवैज्ञानिक और अंधविश्वास फैलाने वाला बताया है। पार्टी ने कहा है कि कोरोना संकट का मुकाबला दिया जलाने से नहीं, बल्कि जांच, इलाज, संसाधन, सुरक्षा उपकरण, राहत मुहैया कराने और वैज्ञानिकता फैलाने के ही जरिये हो सकता है।

पार्टी के उत्तर प्रदेश के सचिव सुधाकर यादव ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर लोगों का मेडिकल परीक्षण, चिकित्सा सुविधा व मेडिकल स्टाफ के लिए सुरक्षा उपकरण की जरूरत है। लेकिन इस मामले में चिराग तले ही अंधेरा है। उन्होंने कहा कि कई देशों ने अधिक-से-अधिक लोगों की मेडिकल जांच कराकर महामारी को फैलने से रोका है। लेकिन हमारी सरकार इस मामले में बहुत पीछे है। हमारे डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज करते हुए खुद भी संक्रमित होकर जानें गंवा रहे हैं, क्योंकि उनकी मांग के बावजूद सरकार उन्हें जरूरी सुरक्षा उपकरण जैसे मास्क, दस्ताने, बचाव के लिए खास तरह के बने वस्त्र (पीपीई) आदि उपलब्ध नहीं करा रही है।

इसका सबसे बड़ा एतराज़ ख़ुद पावर ग्रिड के अधिकारियों और कर्मचारियों की तरफ़ से आया है जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर एक साथ पूरे देश की लाइट ऑफ की जाएगी तो उससे पावर ग्रिड के फेल होने की आशंका है।


इस मामले के सामने आने के बाद और उसके दूसरे पहलुओं को लेकर #Hum_Light_Nahi_Bujhaenge का हैशटैग ट्विटर पर ट्रेंड हो गया। और गुजरात में स्वतंत्र विधायक जिग्नेश मेवानी से लेकर तमाम लोग इसके समर्थन में उतर आए।