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जरूरतमंद लोगों की मदद के वादे निकले खोखले! पेट की भूख मिटाने पर संग्राम।
April 28, 2020 • मोंटू राजा • Social

उत्तर प्रदेश कानपुर:-

देशभर में लॉक डाउन जारी है। जिसके बाद तमाम लोग बिना रोजगार की जैसे तैसे अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। ‌ अधिकतम परेशानी का सामना उन लोगों को करना पड़ रहा है जो प्रवासी है और रोजाना दिहाड़ी कमाने वाले लोग है।

करोड़ों लोगों ने अपने रोजगार को दिए हैं जिसके चलते सरकारों का यह दावा है कि वह ऐसे करोड़ों लोगों को खाना मोहिया करवाएगी जिससे वह लॉक डाउन में अपना पेट भर सके। तकरीबन सभी राज्य सरकारों ने यह कहा है कि वह राज्यों के अंदर प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति को दो वक्त का खाना मुहैया करवाएंगे जिसके चलते सरकारों के साथ साथ कई ऐसे समाजसेवी व समाजसेवी संस्थाएं भी सामने आई थी जिनका यह दावा था कि वह जरूरतमंद लोगों को खाना व राशन मुहैया कराएंगे।

लॉक डाउन के चलते भुखमरी का यह हाल हो चुका है कि अब खाने पर लोगों के बीच घमासान हो जाता है। ऐसी ही एक घटना उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर के सेंट्रल स्टेशन की है। जहां पर कई प्रवासी रिक्शा चालक कुली का काम व अन्य प्रतिदिन दिहाड़ी वाला कार्य करते थे। लॉक डाउन के बाद परिस्थितियां विकट हो गई है। लोगों को दो वक्त की रोटी भी नहीं मिल पा रही है। आज सेंट्रल स्टेशन पर मौजूद ऐसी ही एक व्यक्ति ने अपना भोजन कहीं से जुगाड़ कर छुपा के रखा था जिसके बाद अन्य कुछ लोगों ने उसका छिपा हुआ खाना देख लिया और उसके खाने पर हमला कर दिया जिसके चलते हैं दोनों व्यक्तियों में काफी लड़ाई हुई।

स्थाई लोगों से जानकारी प्राप्त की तो पता चला की पेट की भूख को मिटाने के लिए दोनों लोगों में झगड़ा है। साथ ही मौजूदा लोगों ने यह भी बताया की किसी तरह की कोई सरकारी व संस्थाओं की मदद उन्हें नहीं मिल पा रही है। उन लोगों के पास दिन में दो वक्त की रोटी नहीं है। उनमें एक महिला भी मौजूद थी जिसने बताया कि उसका 1 महीने का बच्चा है जिसके लिए दूध उपलब्ध नहीं है और वह कभी कभी पानी में चीनी मिलाकर बच्चे को पिला देती है। बाकी सभी मौजूदा लोगों की परिस्थिति बहुत ही गंभीर है कई महिलाएं ऐसी थी जो अपनी हालत बताते बताते रो दी। बड़ी-बड़ी संस्थाएं व सरकार जहां यह दावे कर रही है कि देश के अंदर हर जरूरतमंद की जरूरतों को पूरा करवाने में सरकार प्रयास कर रही है वाह तमाम जरूरतमंद लोगों को दो वक्त का खाना मुहैया कराया जा रहा है वहीं जमीनी सच्चाई कुछ और ही दिखाई दे रही है।