ALL Crime Politics Social Education Health
DSP दविंदर सिंह के मामले में NIA को मिली बड़ी कामयाबी, आतंकियों का मददगार तारिक अहम गिरफ्तार
April 30, 2020 • आशू यादव • Crime

*आशू यादव की खास रिपोर्ट SUB Bureau Chief Kanpur*✒️✒️
➖➖➖➖➖➖➖➖
     *भ्रष्टाचार और जुर्म के खिलाफ हर पल आपके साथ*
➖➖➖➖➖➖➖➖


*DSP दविंदर सिंह के मामले में NIA को मिली बड़ी कामयाबी, आतंकियों का मददगार तारिक अहम गिरफ्तार*

*जम्मू-कश्मीर में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों की मदद करते हुए पकड़े गए निलंबित पुलिस ऑफिसर दविंदर सिंह के केस में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को बड़ी कामयाबी मिली है. NIA ने तारिक़ अहमद मीर नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया है. सूत्रों के मुताबिक मीर आतंकियों और पुलिस के रिश्ते का सबसे बड़ा राज़दार है और इस बाबत कई बड़े खुलासे कर सकता है. NIA की जम्मू ब्रांच ने इस शख्स को* *गिरफ्तार किया है. DSP दविन्दर सिंह मामले में तारिक़ मीर को मिलाकर अब तक सात गिरफ्तारियां हो चुकी है.*

*तारिक़ अहमद मीर हिजबुल का ओवरग्राउंड वर्कर है. वो शोपियां का रहने वाला है और आतंकियों को लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा बलों की मौजूदगी की सूचना देने और दूसरी के तरह की मदद मुहैया करवाने की वजह से आतंकियों का लाइफलाइन माना जाता था. वो सरपंच भी रह चुका है.*

*बता दें कि 11 अप्रैल को पटियाला हाउस कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के निलंबित डीएसपी दविंदर सिंह को 27 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. विशेष न्यायाधीश अजय कुमार जैन ने दविंदर सिंह को छह मई तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. इससे पहले दविंदर को पुलिस रिमांड पर भेजा गया था. पुलिस ने अदालत से कहा कि आरोपी से और ज्यादा पूछताछ करने की जरूरत नहीं है.*

*दविंदर को जनवरी 2020 में गिरफ्तार किया गया था. कुलगाम ज़िले में सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस ऑफिसर दविंदर सिंह को दो आतंकी के साथ गिरफ्तार किया था. ऑफिसर और आतंकी को उस वक्त पकड़ा गया, जब ये तीनों एक साथ एक कार में सवार होकर कहीं जा रहे थे. पुलिस के मुताबिक, दविंदर के हिजबुल मुजाहिदीन के दो मोस्टवांटेड आतंकी पीछे की सीट पर बैठे थे.*

*सूत्रों के मुताबिक, दविंदर ने आतंकियों को पनाह देने के लिए तीन अलग-अलग घर बना रखे थे. दविंदर ने न सिर्फ अपने श्रीनगर के इंदिरानगर के घर पर आतंकियों के रहने का इंतजाम किया, बल्कि चानपोरा और सनत नगर इलाकों में भी उनके रहने की व्यवस्था की. आरोप है कि ये घर निर्दोष लोगों को आतंकवाद के मामले में फंसाकर उनसे लिए गए पैसे से बनाए गए.*