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दिल्ली हिंसा को देखने के बाद भी अगर आप कर रहे हैं हिंदू-मुसलमान, तो मर गए हैं आपके जज्बात*
February 29, 2020 • आशू यादव

*दिल्ली हिंसा को देखने के बाद भी अगर आप कर रहे हैं हिंदू-मुसलमान, तो मर गए हैं आपके जज्बात*
 
 *किसने भड़काऊ बयान दिया, किसने आग लगाई, वो कौन लोग थे दिल्ली को जलाकर 40 से ज्यादा जिंदगियां लील गए. यह सवाल उन तमाम मासूमों और माओं की आंखों से गिरते आंसू कर रहे हैं. यह सवाल अंकित शर्मा की मां, राहुल सोलंकी के पिता और मुदस्सिर खान के मासूम बेटे के आंखों से गिरते आंसू कर रहे हैं.*

*मुस्तफाबाद के मुदस्सिर खान अब इस दुनिया में नहीं है. जब उनका शव घर पहुंचा तो पूरे इलाके का दर्द से दिल फट गया. उनके जनाज़े की एक ऐसी तस्वीर कैमरे सामने आई है जो सैकड़ों सवाल पूछ रही है. वो सवाल जो हर जिंदा इंसान को झकझोर कर रख देंगे. यहां जिंदा होने का मतलब सांस चलना नहीं, बल्कि दिल में इंसानियत होना है.*

*जरा सोचिए, एक मासूम अपने पिता को खामोश लेटा देखकर रो-रोकर क्या सोच रहा होगा ? जिस उम्र में उसे अपने पिता का साथ चाहिए था उस उम्र में उसके पिता उसका साथ छोड़कर चले गए. नेताओं की फैलाई नफरत ने अब उसके सिर से पिता का साया छीन लिया है.*

*अब वो स्कूल के बाहर अपने पिता का इंतजार नहीं करेगा. अच्छा रिजल्ट लाने पर उसको शाबाशी कौन देगा ? दुनिया में अच्छे-बुरे का फर्क अब उसके कौन बताएगा ? उसके आंखों से गिरता एक-एक आंसू देश से सवाल पूछ रहा है ? उसका क्या कुसूर जो इतनी छोटी उम्र में पिता का साया उससे छीन लिया गया?*

*जब ये रुला देने वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर दिखाई पड़ी तो लोगों ने अपने बच्चों को सोचकर सवाल पूछे. लालू यादव की पार्टी आरजेडी ने इसको ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा-*

*संविधान को एक सोई किताब मानने वालों, इंसानों को हिन्दू-मुसलमान में बाँटने वालों, अपने ज़हर से घरों को बर्बाद करने वालों, अपनी सियासत के लिए खून बहाने वालों, अगर इस बच्चे का दर्द तुम्हें नहीं झकझोरता है तो आज मान लो कि तुम इंसान नहीं! और यह देश वही अपना पुराना हिंदुस्तान नहीं!*

*वाकई, देश का दिल, दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश की राष्ट्रीय राजधानी, दिल्ली हिंसा में जलकर राख तो नहीं हुई लेकिन नफरत करने वालों की नस्लों पर सवाल जरूर छोड़ गई है.*