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दिल्ली दंगों के बाद इंसानियत को सबसे ऊपर रखते जिंदगी के रियल हीरो
March 8, 2020 • Montoo raja

जमीन पर आज भी रियल हीरो पाए जाते हैं। दिल्ली मैं 24 फरवरी 2020 के बाद जो दंगे भड़के उसमें तमाम लोगों ने अपने घर परिवार और कई चीजों को खो दिया है। यह लोग अपना दर्द भुला तो नहीं सकते मगर इनका दर्द कुछ कम किया जा सकता है और इसी के प्रयास में कई लोग हमने देखे जिन्हें हमने कहा जिंदगी का रियल हीरो।

दिल्ली के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में दंगों के दौरान कई दुकानें लूटी गई कई घरों में आग लगाई गई गाड़ियों में आगजनी की गई आदि। सीएए का विरोध प्रदर्शन जिसके बाद 24 फरवरी 2020 को समर्थन में लोग उतरे। सीएए के प्रदर्शन के बाद जब उपद्रव हुआ तो यह प्रदर्शन सीए का ना होकर इस उपद्रव को पूरी तरह धर्म का रंग दे दिया गया।

दिल्ली के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में देखा गया के दो गुट बन गए जिसमें हिंदू मुसलमान के तर्क पर दंगा भड़का मारकाट हुई लोगों को लूटा गया गाड़ियों की आगजनी हुई इन तमाम चीजों के बाद उस विकट परिस्थिति में कोई नेता नजर नहीं आया पुलिस भी पूरी असहाय मालूम पड़ी परंतु उन परिस्थितियों को संभालने के लिए स्थानीय लोगों ने जात , धर्म से ऊपर उठकर इंसान और इंसानियत की मदद की। स्थानीय लोगों ने बताया जिन्होंने भी दंगा भड़काया व स्थानीय लोग नहीं थे उन्हें नहीं पता वह कहां से आए थे और कहां चले गए माहौल में आग लगाकर , दिल्ली में आग लगा कर।

स्थानीय लोगों ने आपसी भाईचारा कायम कर लोगों की मदद करी और इस समय लोगों ने नहीं देखा कि वह किस धर्म के हैं किस जाति के हैं किस समुदाय से हैं, सिर्फ इंसान और इंसानियत को सबसे ऊपर रख काम किया।

ऐसी ही कुछ लोग हमारे साथ आज मौजूद हैं जो दिल्ली के उत्तर पूर्वी क्षेत्र नंद नगरी और सुंदर नगरी से हैं यह क्षेत्र जनसंख्या के हिसाब से काफी बड़ा है बावजूद इसके जब दिल्ली जल रही थी इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का उपद्रव यह हिंसा नहीं हुई। स्थाई लोगों ने मोहल्ले मोहल्ले में जाकर मुस्लिम हिंदू मुस्लिम एकता भाईचारा व शांति बनाए रखने की अपील की मीटिंग्स की जिसके परिणाम स्वरूप आज घनी आबादी होने के बावजूद उत्तर पूर्वी दिल्ली के यह तो क्षेत्र सुर्खियों में भी आए व पुलिस प्रशासन द्वारा भी उनकी सराहना की गई।

आज स्थाई लोगों ने अमन प्रतिभा कमेटी की छत के नीचे तमाम लोगों की मदद की गई। जिसमें 2 से 3 दिनों में ₹100000 से ऊपर की राशि जमा हुई। और अब यह लोग जो दंगों के अंदर पीड़ित परिवार थे उन परिवारों को इन पैसों से राहत पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।