लखनऊ में मौजूद बड़ा इमामबाड़ा जो पर्यटक स्थल भी है!

 लखनऊ 


वैसे तो पर्यटकों के लिए देश में बहुत सारे स्थल है जहां वह जाते हैं अगर बात करी जाए उत्तरप्रदेश की तो आगरा के बाद दूसरा स्थान आता है लखनऊ और लखनऊ में जो मौजूद ऐतिहासिक स्थल है वह इसका मुख्य कारण है।



लखनऊ में मौजूद बड़ा इमामबाड़ा और छोटा इमामबाड़ा लोगों का बहुत लोकप्रिय है। यह जगह सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है। बड़े इमामबाड़े कि छत के ऊपर भूल भुलैया बनी है जिसे पर्यटक देखना बहुत पसंद करते है।



पर वैसे वह इंजीनियर का एक डिजाइन है जिसने बड़े इमामबाड़े कि छत रोक के राखी है। बिना भीम के इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वह एक ब्रिज के रूप में लगती है। लियाकत हुसैन इसके इंजीनियर रहे, इसे आसफ उद दौला ने बनवाया था, दरअसल इसके पास एक सुंदर मस्जिद भी बनी है क्योंकि आसफ उद दौला को इमाम हुसैन से बहुत प्यार था जिसके चलते उन्होंने बड़ा इमामबाड़ा बनवाया था। और मस्जिद बनवाने से पहले पहली ईट के लिए कई उलेमाओं को बुलवाया गया था और कहा गया था जिसकी आज तक फज्र की नमाज़ नहीं छोटी वह ईट रखे तो मस्जिद की ईट आसफ उद दौला ने राखी थी। 


आसफ उद दौला के लिए कहा जाता है जिसे ना दे मौला उसे दे आसफ उद दौला इसके पीछे की भी एक कहानी है जब अवध में सूखा पड़ गया था तब आसफ उद दौला ने निर्माण चालू करवाया था और मजदूरी का काम करवाया था लोगो के आत्मसम्मान को ठेस न लगे तो मजदूरी करवा कर उन्हें पैसा दिया जाता था जिन्हें इमारत बनानी नहीं आती थी उनसे इमारत तुड़वाई जाती थी ताकि उनकी भी मदद की जा सके। उसके बाद से ये कहा जाने लगा जिसे न दे मौला उसे दे आसफ उद दौला। 



इन ऐतिहासकि इमारतों को देखने के लिए न की केवल देश बल्कि विदेशों से भी लोग आते हैं। रूमी गेट भी अहम धरोहर है, अवध की पहचान है। आगरा के बाद उत्तर प्रदेश में लखनऊ ही है जहां पर्यटक आता है। बड़े इमामबाड़े में कुछ चीजें नायाब है। वहीं बारी गांव भी है जिसे संरक्षण की जरूरत है शासन प्रशासन को इन धरोहर को बचाने और संजो कर रखने के लिए अहम कदम उठाने चाहिए।



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