हीट वेव से निपटने के लिए एमसीडी का व्यापक एक्शन प्लान तैयार — सत्या शर्मा

दिनांक : 5 मई 2026

नई दिल्ली। 


राजधानी में बढ़ती गर्मी और हीट वेव के संभावित प्रभाव को देखते हुए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने वर्ष 2026 के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इस संबंध में स्थायी समिति की अध्यक्ष श्रीमती सत्या शर्मा ने कहा कि निगम द्वारा तैयार यह एक्शन प्लान दिल्लीवासियों और निगम कर्मचारियों को लू के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से बनाया गया है।



सत्या शर्मा ने बताया कि यह योजना दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के ‘हीट वेव एक्शन प्लान-2026’ के अनुरूप तैयार की गई है, जिसमें विभिन्न विभागों की भूमिका स्पष्ट रूप से तय की गई है। इसके तहत एमसीडी के सभी जोनों और विभागों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।


उन्होंने कहा कि योजना के तहत निगम के कार्यालयों, स्कूलों, डिस्पेंसरी और सामुदायिक केंद्रों में ठंडे पेयजल की समुचित व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही पंखे, एयर कूलर और जरूरत के अनुसार अन्य शीतलन सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। बाजारों और अधिक भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी पीने के पानी की व्यवस्था करने पर जोर दिया गया है।


सत्या शर्मा ने बताया कि पार्कों में आम लोगों के साथ-साथ पक्षियों और जानवरों के लिए भी पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। वहीं, निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों के लिए छाया, पेयजल और ओआरएस किट उपलब्ध कराने का प्रावधान भी इस योजना में शामिल है।


उन्होंने कहा कि निगम के सफाई कर्मचारियों और माली वर्ग के कर्मचारियों को भी ओआरएस किट उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे हीट वेव के प्रभाव से सुरक्षित रह सकें। साथ ही, उनके कार्य समय को भी गर्मी के अनुसार संतुलित करने का प्रावधान किया गया है।


स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में सत्या शर्मा ने बताया कि अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं, जिसमें ओपीडी और प्रतीक्षालयों में कूलिंग की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।


उन्होंने यह भी कहा कि कचरे के समय पर निस्तारण को योजना का अहम हिस्सा बनाया गया है, जिससे गर्मी के दौरान उत्पन्न होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों और आग लगने की घटनाओं को रोका जा सके। इसके अलावा वार्ड स्तर पर हीट वेव से संबंधित जागरूकता बढ़ाने और चेतावनी संदेशों के प्रसार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।


सत्या शर्मा ने कहा कि एमसीडी का यह एक्शन प्लान व्यापक और जनहित को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है तथा इसका उद्देश्य दिल्ली के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित रखना है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे भीषण गर्मी के दौरान सतर्क रहें और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का पालन करें।

कांग्रेस अल्पसंख्यकों का अपना घर है : इमरान प्रतापगढ़ी

  

लखनऊ सम्मेलन में 2027 को लेकर  गरजे इमरान प्रतापगढ़ी 

लखनऊ ! 


उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा नेहरू भवन लखनऊ में आयोजित अल्पसंख्यक समाज सम्मेलन में राज्यसभा सांसद एवं अखिल भारतीय कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी ने विस्तृत और तीखा बयान देते हुए कहा कि “कांग्रेस ही अल्पसंख्यकों का अपना घर है और यह बात इतिहास, संघर्ष और कुर्बानियों से साबित होती है। आज देश एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां नफरत की राजनीति को सुनियोजित तरीके से फैलाया जा रहा है, ताकि जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके।”



उन्होंने कहा कि “आज नौजवान बेरोजगारी से परेशान है, किसान संकट में है और महंगाई आसमान छू रही है, लेकिन इन मुद्दों पर बात करने के बजाय समाज को धर्म और जाति के नाम पर बांटने की कोशिश की जा रही है। भाजपा सरकार डर और नफरत की राजनीति कर रही है, लेकिन हिंदुस्तान की गंगा-जमुनी तहजीब को कोई खत्म नहीं कर सकता।”


इमरान प्रतापगढ़ी ने आगे कहा कि “यह देश संविधान से चलता है और कांग्रेस ने हमेशा संविधान की रक्षा की है। जब-जब इस देश पर खतरा आया, तब-तब कांग्रेस ने आगे बढ़कर लोकतंत्र और भाईचारे को बचाने का काम किया है। आज कुछ ताकतें संविधान को कमजोर करना चाहती हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। 2024 में जनता ने उनके घमंड को तोड़ा है और 2027 में उत्तर प्रदेश की जनता उन्हें पूरी तरह जवाब देगी।”


उन्होंने कांग्रेस की विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि “मौलाना अबुल कलाम आजाद को देश का पहला शिक्षा मंत्री बनाना हो, डॉ. जाकिर हुसैन को राष्ट्रपति बनाना हो या डॉ. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाना—कांग्रेस ने हमेशा हर वर्ग को आगे बढ़ाने का काम किया है। इसी तरह कांग्रेस ने देश को कई मुस्लिम मुख्यमंत्री भी दिए हैं, जिनमें अब्दुल गफूर (बिहार), ए. आर. अंतुले (महाराष्ट्र) और मोहम्मद अलीमुद्दीन (असम) जैसे नाम शामिल हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि पार्टी ने हमेशा अल्पसंख्यकों को नेतृत्व और प्रतिनिधित्व दिया है। इसलिए हम कहते हैं कि कांग्रेस आपका अपना घर है, यहां आप किराएदार नहीं बल्कि मालिक हैं।”


उन्होंने अल्पसंख्यक समाज से अपील करते हुए कहा कि “अब वक्त आ गया है कि आप अपनी सियासी ताकत को पहचानें, बिखराव छोड़ें और एकजुट होकर कांग्रेस को मजबूत करें। उत्तर प्रदेश की राजनीति देश की दिशा तय करती है और अगर यहां बदलाव होगा तो पूरे देश में उसका असर दिखेगा। नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोलनी होगी और यही कांग्रेस का रास्ता है।”


इस मौके पर नव-नियुक्त उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक सुहैल अंसारी ने विधिवत रूप से पदभार ग्रहण किया।

सुहैल अंसारी ने कहा कि “उत्तर प्रदेश हमेशा देश की राजनीति को दिशा देता रहा है। अब समय आ गया है कि अल्पसंख्यक समाज अपनी ताकत पहचाने और एकजुट होकर कांग्रेस के साथ खड़ा हो। 2027 का चुनाव ऐतिहासिक होगा और इसमें अल्पसंख्यकों की निर्णायक भूमिका होगी। कांग्रेस ही वह पार्टी है जिसने हमेशा हमें सम्मान और भागीदारी दी है और आगे भी हमारे हक की लड़ाई मजबूती से लड़ती रहेगी।”

कार्यक्रम में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और प्रदेश भर से आए हजारों कार्यकर्ता मौजूद रहे। 

सम्मेलन में संगठन को मजबूत करने और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर स्पष्ट संदेश दिया गया कि कांग्रेस जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

धमकियों के बीच फंसी सुनवाई: पप्पू यादव मामले में सुप्रीम कोर्ट का अहम कदम

नई दिल्ली, दिनांक 04 मई 2026:


आज सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के सांसद Rajesh Ranjan की याचिका पर सुनवाई की। इस याचिका में Lawrence Bishnoi gang से जान से मारने की धमकियों का मुद्दा उठाया गया है।


यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने आया।



सुनवाई के दौरान बताया गया कि पप्पू यादव की सुरक्षा से जुड़ी याचिका 19 नवंबर 2024 से हाई कोर्ट में लंबित है, लेकिन कई बार कहने के बावजूद उस पर सुनवाई नहीं हो रही है।


याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील Shadan Farasat और अधिवक्ता कनिष्क अरोड़ा ने कोर्ट को बताया कि उन्हें अभी सिर्फ “Y कैटेगरी” की बहुत सीमित सुरक्षा (सिर्फ दो सुरक्षाकर्मी) मिली हुई है, जबकि खतरा काफी गंभीर है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके परिवार के एक सदस्य पर हमला करने की कोशिश भी हुई है।


कोर्ट को यह भी बताया गया कि हाई कोर्ट का नोटिस ऑर्डर तक अपलोड नहीं हुआ है, जिसकी वजह से आगे की कानूनी प्रक्रिया भी रुक गई है।


सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आम तौर पर वह ऐसे मामलों में सीधे दखल नहीं देता जो हाई कोर्ट में लंबित हों। लेकिन इस मामले में लंबे समय से सुनवाई न होने की स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने राहत दी और कहा कि याचिकाकर्ता हाई कोर्ट में आवेदन देकर अपनी याचिका की जल्दी सुनवाई की मांग कर सकता है  और उम्मीद जताई कि हाई कोर्ट इस पर उचित और जल्दी निर्णय लेगा।



मीडिया प्रभारी का बयान:

“यह एक असाधारण स्थिति थी, जहां एक सांसद को गंभीर धमकियां मिल रही हैं और उनकी याचिका महीनों तक सूचीबद्ध नहीं हो रही थी। सुप्रीम कोर्ट आमतौर पर ऐसे मामलों में सीधे हस्तक्षेप नहीं करता, लेकिन इस मामले में कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया कि न्याय की प्रक्रिया आगे बढ़े। यह आदेश इस बात का संकेत है कि ऐसे गंभीर मामलों को अनदेखा नहीं किया जा सकता।”


मामले की जानकारी:

मामला: राजेश रंजन @ पप्पू यादव बनाम भारत संघ

केस नंबर: W.P. (Criminal) No. 164/2026

याचिका दायर: अधिवक्ता कनिष्क अरोड़ा 


आवासीय क्षेत्रों के सर्वे पर सत्या शर्मा ने कहा, वैध कारोबारियों को घबराने की जरूरत नहीं

दिल्ली नगर निगम

दिनांक : 3 मई 2026



 सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत आवासीय क्षेत्रों में गैर-आवासीय उपयोग वाले परिसरों के सर्वे को लेकर राजधानी में फैले भ्रम के बीच दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने स्पष्ट कहा कि दिल्ली मास्टर प्लान 2021 तथा दिल्ली स्पेशल प्रोविज़न्स एक्ट के तहत संरक्षित परिसरों और वैध व्यावसायिक गतिविधियों पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होगी। उन्होंने व्यापारियों और संपत्ति मालिकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें।



सत्या शर्मा ने कहा कि सर्वे का उद्देश्य केवल उन मामलों की पहचान करना है, जहां नियमों का स्पष्ट उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो कारोबारी मास्टर प्लान 2021 के प्रावधानों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं, उन्हें डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। “यह सर्वे अवैध उपयोग, बड़े स्तर पर व्यावसायिक अतिक्रमण और गैर-कानूनी गतिविधियों की पहचान के लिए किया जा रहा है, न कि छोटे और वैध कारोबारियों को परेशान करने के लिए,” उन्होंने कहा।


उन्होंने बताया कि मास्टर प्लान दिल्ली 2021 में मिश्रित उपयोग (मिक्स्ड यूज) और स्थानीय सुविधा आधारित व्यापार के लिए स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत आवासीय क्षेत्रों में सीमित आकार की दुकानें, सेवा प्रतिष्ठान और प्रोफेशनल गतिविधियां अनुमत हैं। मास्टर प्लान के प्रावधानों के अनुसार रिहायशी क्षेत्रों में 20 वर्ग मीटर तक की दुकानों को अनुमति है और 24 श्रेणियों की गतिविधियां वैध रूप से संचालित हो सकती हैं।


इन 24 श्रेणियों में किराना स्टोर, फल-सब्जी, दवा दुकान, डेयरी, स्टेशनरी, दर्जी, ब्यूटी पार्लर, ड्राई क्लीनर, साइबर सेवा, मोबाइल मरम्मत, फोटोकॉपी, ट्रैवल एजेंसी, क्लिनिक, पैथोलॉजी, ट्यूशन सेंटर, छोटी खाद्य सेवा इकाइयां और अन्य स्थानीय सुविधा आधारित सेवाएं शामिल हैं। सत्या शर्मा ने कहा कि ये सभी गतिविधियां यदि निर्धारित मानकों के अनुसार चल रही हैं, तो उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।


स्थायी समिति अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली स्पेशल प्रोविज़न्स एक्ट के तहत जिन परिसरों को संरक्षण प्राप्त है, वे भी सुरक्षित रहेंगे। यह कानून उन क्षेत्रों को अस्थायी राहत देता है, जहां नियमितीकरण या पुनर्विकास की प्रक्रिया लंबित है। ऐसे मामलों में अंतिम नीति लागू होने तक दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाती। सत्या शर्मा ने कहा कि सर्वे को लेकर बाजारों में जो भ्रम फैलाया जा रहा है, वह अनावश्यक है। “नियमों के दायरे में चल रहे व्यापार को कोई नुकसान नहीं होगा।


उन्होंने व्यापारिक संगठनों से संवाद बनाए रखने की बात भी कही और भरोसा दिलाया कि किसी भी वैध कारोबारी के हितों को नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा। उनके इस बयान से राजधानी के बाजारों और संपत्ति मालिकों में फैली चिंता काफी हद तक कम हुई है।

48 गांवों को शहरी दर्जा—अब विकास सीधे जमीन पर दिखेगा” : सत्या शर्मा

दिल्ली


*एमपीडी-2041 के एजेंडे को मिली रफ्तार*


दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की अध्यक्ष श्रीमती सत्या शर्मा ने 48 ग्रामीण गांवों को शहरी गांव घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए इसे राजधानी के नियोजित और संतुलित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।



स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा ने कहा कि यह निर्णय केवल नीतिगत बदलाव नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाले विकास की दिशा में ठोस पहल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो गांव व्यवहार में शहरी स्वरूप ले चुके हैं, उन्हें औपचारिक रूप से शहरी दर्जा देना आवश्यक था, ताकि वहां विकास कार्यों को व्यवस्थित रूप से लागू किया जा सके।


उन्होंने बताया कि यह निर्णय दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 507 (क) के अंतर्गत लिया गया है। इसके लागू होने से संबंधित क्षेत्रों में सड़क, सीवर, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और कूड़ा प्रबंधन जैसी बुनियादी सुविधाओं को अधिक प्रभावी और जवाबदेह तरीके से सुनिश्चित किया जा सकेगा।


स्थायी समिति अध्यक्ष ने कहा कि यह कदम दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के मास्टर प्लान-2041 के अनुरूप है और तेजी से हो रहे शहरीकरण को व्यवस्थित करने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में पहले से ही शहरी गतिविधियां बढ़ चुकी हैं, वहां कानूनी रूप से शहरी ढांचा लागू होने से बेहतर योजना और नियमन संभव हो सकेगा।


उन्होंने आगे कहा कि इस निर्णय से अवैध निर्माण पर नियंत्रण मजबूत होगा, क्योंकि अब सभी निर्माण और भूमि उपयोग नगर निगम के नियमों के अंतर्गत आएंगे। साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को भी स्पष्ट दिशा मिलेगी।


स्थायी समिति अध्यक्ष ने बताया कि ये 48 गांव दिल्ली के विभिन्न जिलों—बाहरी उत्तरी, उत्तरी, उत्तर-पूर्वी, उत्तर-पश्चिमी, दक्षिणी, दक्षिण-पश्चिमी और दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां भविष्य में व्यापक विकास योजनाएं लागू की जानी हैं।


उन्होंने कहा कि स्थायी समिति द्वारा मंजूरी के पश्चात यह प्रस्ताव अब निगम सदन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद इसे केंद्र सरकार को अंतिम अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। अधिसूचना जारी होते ही इन गांवों को औपचारिक रूप से शहरी दर्जा प्राप्त हो जाएगा।


अंत में स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा ने कहा कि यह निर्णय दिल्ली के संतुलित, नियोजित और जवाबदेह विकास की मजबूत नींव रखेगा तथा नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होगा।

दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल द्वारा बिहारी युवकों की हत्या कानून व्यवस्था पर कलंक, दोषी को मिले फांसी: राजेश रंजन (पप्पू यादव)

नई दिल्ली | दिनांक: 28 अप्रैल, 2026


दिल्ली में खगड़िया जिले के गंगौर थाना क्षेत्र निवासी पाण्डव कुमार और उनके मित्र की निर्मम हत्या पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने आज घटनास्थल का दौरा किया और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने घटना को न केवल दुखद, बल्कि दिल्ली पुलिस की कार्यशैली और भाजपा शासित क्षेत्रों में बिहारियों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान बताया।



घटना का विवरण और निष्पक्ष जांच की मांग

सांसद ने घटनास्थल पर पीड़ित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी का हवाला देते हुए बताया कि देर रात्रि दिल्ली पुलिस में कार्यरत हेड कांस्टेबल नीरज कुमार ने दोनों युवकों को "बिहारी" कहकर अपमानजनक गालियां दीं और उसके बाद उन पर गोलियां बरसा दीं।

सांसद ने दो टूक शब्दों में कहा:

"यह हत्या सीधे तौर पर नस्लीय घृणा और सत्ता के अहंकार का परिणाम है। वर्दी की आड़ में आम लोगों, विशेषकर बिहार के युवाओं को निशाना बनाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम इस मामले में उच्चस्तरीय जांच के साथ-साथ दोषी हेड कांस्टेबल नीरज कुमार के लिए फांसी की सजा की मांग करते हैं।"

बिहार सरकार और केंद्र पर साधा निशाना

इस घटना को लेकर सांसद ने बिहार के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आखिर भाजपा शासित राज्यों में बिहार के गरीब और आम लोगों के साथ लगातार अत्याचार की खबरें क्यों आ रही हैं?



मुख्य मांगें:

1. दोषी हेड कांस्टेबल के खिलाफ त्वरित न्यायालय (Fast Track Court) में मुकदमा चलाकर फांसी की सजा सुनिश्चित की जाए।

2. घटना की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच हो ताकि पर्दे के पीछे के कारणों का पता चल सके।

3. पीड़ित परिवार को दिल्ली और बिहार सरकार की ओर से तत्काल आर्थिक सहायता और सुरक्षा प्रदान की जाए।

सांसद ने अंत में चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि बिहार के लोगों की सुरक्षा को इसी तरह "भगवान भरोसे" छोड़ दिया गया और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़कों पर उतरकर न्याय की लड़ाई लड़ेंगे।

गौतमपुरी में “जन आक्रोश महिला पदयात्रा”, महिलाओं के अधिकारों व सुरक्षा के लिए बुलंद हुई आवाज — सत्या शर्मा*

 दिल्ली

दिनांक : 27 अप्रैल 2026


स्थायी समिति अध्यक्ष श्रीमती सत्या शर्मा के नेतृत्व में आज गौतमपुरी क्षेत्र में “जन आक्रोश महिला पदयात्रा” का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में मातृशक्ति ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह पदयात्रा महिलाओं के अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा के मुद्दों को लेकर एक सशक्त जनआवाज़ के रूप में उभरी।



इस अवसर पर स्थायी समिति अध्यक्ष श्रीमती सत्या शर्मा ने कहा कि महिलाओं के हक और सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों पर कांग्रेस की नीतियों में निरंतर उदासीनता देखने को मिली है, जिसके विरोध में यह जनआक्रोश स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।


उन्होंने कहा कि यह पदयात्रा केवल विरोध का माध्यम नहीं, बल्कि नारी शक्ति के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों के प्रति एक दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। बड़ी संख्या में शामिल महिलाओं ने एकजुट होकर स्पष्ट संदेश दिया कि अब उनके अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय या समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


स्थायी समिति अध्यक्ष ने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज में महिलाओं की भागीदारी और जागरूकता बढ़ने से सकारात्मक परिवर्तन और मजबूत होगा।


कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया और महिला सशक्तिकरण के लिए सामूहिक संकल्प दोहराया गया।

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