नई दिल्ली।
हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजों में कांग्रेस पार्टी की सफलता के पीछे जिन नेताओं की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, उनमें राज्यसभा सांसद एवं कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। केरल से लेकर असम और बंगाल तक उनके चुनाव प्रचार ने कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक फायदा पहुंचाया है।
कांग्रेस नेतृत्व ने इमरान प्रतापगढ़ी को केरल का सीनियर ऑब्जर्वर बनाकर भेजा था। उन्होंने वहां लंबा समय बिताते हुए लगातार जनसभाएं और रैलियां कीं। बताया जा रहा है कि उन्होंने कांग्रेस और IUML प्रत्याशियों के समर्थन में 26 सीटों पर प्रचार किया और सभी सीटों पर गठबंधन को जीत हासिल हुई। इनमें एक ऐसी सीट भी शामिल रही, जहां पिछले 59 वर्षों से कांग्रेस जीत दर्ज नहीं कर पाई थी। इस बार कांग्रेस ने वामपंथी दलों के मजबूत गढ़ को भी ध्वस्त कर दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इमरान प्रतापगढ़ी ने मुस्लिम समाज के बीच मजबूत पकड़ बनाकर कांग्रेस के पक्ष में माहौल तैयार किया। उनके भाषणों और जनसंपर्क अभियानों का सीधा असर चुनाव परिणामों में देखने को मिला।
असम में भी कांग्रेस ने उन्हें विशेष जिम्मेदारी सौंपी। उस समय बदरुद्दीन अजमल और असदुद्दीन ओवैसी की सक्रियता को देखते हुए मुकाबला चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था। कांग्रेस ने रणनीति के तहत इमरान प्रतापगढ़ी को असम भेजा, जहां उन्होंने उन नौ विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार किया जिन्हें विपक्षी दलों ने अपना मजबूत क्षेत्र माना था। चुनाव परिणाम आने पर अधिकांश सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों को जीत मिली।
इसी तरह पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस ने अपना खाता खोलने में सफलता हासिल की। फरक्का सीट, जहां इमरान प्रतापगढ़ी ने बड़ी जनसभा की थी, कांग्रेस के खाते में जाने के बाद उनके प्रचार अभियान की चर्चा और तेज हो गई है।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार इस चुनाव में गांधी परिवार और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा जिन नेताओं की सबसे अधिक मांग रही उनमें इमरान प्रतापगढ़ी का नाम सबसे प्रमुख रहा। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनकी जनअपील, प्रभावशाली भाषण शैली और जमीनी संपर्क ने कांग्रेस को कई अहम क्षेत्रों में मजबूती दिलाई।
दक्षिण भारत से लेकर पूर्वोत्तर और बंगाल तक कांग्रेस के प्रदर्शन में इमरान प्रतापगढ़ी की सक्रिय भूमिका को पार्टी के लिए एक बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही साथ जिस तरह कांग्रेस का अल्पसंख्यक विभाग आज हर जगह कांग्रेस की संगठन और चुनावी राह आसान कर रहा है और अल्पसंख्यक विभाग और उसके नेता हर जगह कठिन परिश्रम करते दिखाई देते हैं इसका श्रेय भी इमरान प्रतापगढ़ी को जाता है क्योंकि पहली बार ऐसा देखा जा रहा है कि कांग्रेस का अल्पसंख्यक विभाग सारे देश में मजबूती के साथ हर जगह हर चुनाव में दिखाई देता है









